'जिन्न' को जाना ही होगा बोतल में

Publicado  मंगलवार, अप्रैल 20, 2010

प्रशांत रायचौधरी
कुछ साल पहले भारतीय क्रिकेट के महाशक्तिशाली व्यक्तित्व जगमोहन डालमिया से निपटने के लिए वरिष्ठ क्रिकेट प्रशासक आईएस बिंद्रा ने बोतल से एक 'जिन्न' को बाहर निकाला था और उस जिन्न ने 'जो हुक्म मेरे आका' कह कर वह सबकुछ किया जो डालमिया को निपटाने के लिए आवश्यक समझा गया। उसने न केवल कूटनीति के जरिए बल्कि बीसीसीआई की बैठकों में अपमान की हद तक जाकर डालमिया को नेपथ्य में ढकेल दिया। जिन्न बोतल से निकल चुका था और वह इतना शातिर हो गया कि उसे बोतल में डालना मुश्किल सा हो गया है।

जिन्न ने बोतल में जाने के बदले आईपीएल के रूप में एक नया फॉर्मूला पेश किया जिसमें बेशुमार धन तो था ही साथ ही सूरा व सुंदरी के मजे ही मजे थे। फिर क्या था धन लोलुप बीसीसीआई ने इस फॉर्मूले को हकीकत का जामा पहना दिया। देखते ही देखते जिन्न और शक्तिशाली होता चला गया और उसके सामने बीसीसीआई के बड़े से बड़े पदाधिकारी बौने नजर आने लगे।

इस जिन्न को शक्तिशाली बनाने में पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष आईएस बिंद्रा का सबसे बड़ा हाथ था। बिंद्रा पहले से ही कहते रहे हैं कि क्रिकेट में सट्टा को मान्यता मिलनी चाहिए जैसा कि विदेशों में होता है। उनकी चाहत को केंद्र सरकार का सहयोग तो नहीं मिला लेकिन जिन्न समझ गया कि यदि मैं गैरकानूनी तरीके से सट्टेबाजी या मैच फिक्सिंग करूं तो मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। उनकी सोच थी कि हमाम में सभी नंगे हैं। उसने किया भी वही जो उन्हें अच्छा लगा।

ललित मोदी नामक यह जिन्न अब क्रिकेट के लिए हानिकारक होता जा रहा है। केंद्र सरकार और बीसीसीआई की कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके इस जिन्न को बोतल में वापस डाल दिया जाए। अब देखना है कि वे काबू में आ पाते हैं या नहीं। मैंने इसके पहले के लेख में लिखा था कि आईपीएल में मस्ती ही मस्ती है। उसमें मैच फिक्सिंग की भी चर्चा की थी।

आखिर जिन मुद्दों पर मैंने कटाक्ष किया था वह सही साबित हुआ। शशि थरूर-ललित मोदी प्रकरण के बाद आईपीएल जिस कदर बदनाम हुआ है उससे तो यही लगता है कि न केवल ललित मोदी को आईपीएल के कमिश्नर पद से हटा देना चाहिए बल्कि सट्टे का आकार ले रहे इस टूर्नामेंट को बंद कर देना चाहिए।

मोदी से इसलिए सभी हैं नाराज :

ललित मोदी अपने खराब व्यवहार, दंभी स्वभाव व झगड़ालू प्रवृत्ति के कारण कुख्यात हैं। चाहे राजस्थान क्रिकेट संगठन का मसला हो या बीसीसीआई से जुड़े मामलों का उन्होंने अपने दोस्त से ज्यादा दुश्मनों की संख्या बढाई है। यही कारण है कि अब जब आईपीएल पर इंकम टैक्स का छापा पड़ा और मोदी पर मैच फिक्सिंग व सट्टेबाजी में लिप्त होने के प्रमाण मिलने लगे तो लोग उनसे कन्नी काटने लगे हैं। मोदी ने टि्वटर पर शशि थरूर की पोल खोली थी लेकिन अब टि्वटर के कारण ही उनकी भी बिदाई संभव है। मोदी भले कहे कि उनका बाल बांका नहीं होगा लेकिन केंद्र सरकार उन्हें नहीं बख्शने वाली है।

अपार धन आया कहां से?

प्राप्त जानकारी के अनुसार ललित मोदी ने इंकम टैक्स भरने में भी काफी गफलत की है। उन्होंने 2007 में 19 लाख रुपए एडवांस टैक्स भरा। इसके बाद 2008 में 2.5 करोड रुपए टैक्स दिया। 2009 में यह रकम सिर्फ 32 लाख रही लेकिन, 2009-10 में यह बढ़कर 11 करोड रुपए हो गया। आखिर टैक्स भरने में विरोधाभास क्यों? एक साल पहले सिर्फ 32 लाख टैक्स भरने वाले मोदी की कमाई उसी साल 50 करोड़ रुपए तक कैसे पहुंच गई।

मोदी के पास है एरोप्लेन :

विमान, याट के अलावा मर्सिडीज व बीएमडब्ल्यू जैसी ढेरों कारें मोदी के पास है। जिस व्यक्ति ने चार साल पहले कोई टैक्स नहीं भरा था वह एकाएक अपार धन का मालिक कैसे बन गया। अगर सरकार मोदी के खिलाफ कोई कदम उठाने का मन बना चुकी है तो इसमे गलत क्या है।

अब क्या होगा मोदी के साथ :

इंकम टैक्स विभाग राजस्थान टीम की फंडिंग के स्रोत की जानकारी ले रही है। इस टीम में जयपुर आईपीएल प्रालि. की हिस्सेदारी है, जो मोदी के नजदीकी रिश्तेदार सुरेश चेलाराम की है। यह चौंकाने वाला तथ्य है कि गठन से पहले ही इस कंपनी को मॉरीशस से पैसा कैसे मिल गया। मॉरीशस के अलावा कई अन्य देशों से भी राजस्थान रॉयल्स को धन मिल चुका है। माना यह जा रहा है कि मोदी के कारण ही धन की बरसात हुई है

आईपीएल में बस मौजा ही मौजा

Publicado  रविवार, अप्रैल 11, 2010

प्रशांत रायचौधरी
दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख बल्लेबाज हर्शेल गिब्स का कहना है कि वे आईपीएल में खेलने के प्रति गंभीर नहीं है। वे तो मैच के बाद होने वाली रंगीन पार्टियों,चीयर लीडर्स तथा बॉलीवुड अदाकाराओं के सानिध्य का आनंद लेने के लिए भारत आते हैं। इससे पहले भी गत वर्ष शाहिद आफरीदी ने कहा था कि जब सामने चियर लीडर्स हो तो रन कैसे बन सकते हैं। मेरा ध्यान तो उनकी अदाओं पर रहता है।

इसका मतलब यह हुआ ऐसे बहुत से खिलाड़ी होंगे जो आईपीएल से न केवल धन प्राप्त कर रहे हैं बल्कि सूरा व सुंदरियों पर धन भी लुटा भी रहे होंगे। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत उन उभरते खिलाड़ियों को हो रही होगी जिनका अभी क्रिकेट में भविष्य बनना है। ये खिलाड़ी कैरियर बनने से पहले ही रात की रंगीनियों मजा लेने लगे हैं। ललित मोदी के तिलस्म में इनकी तरूणाई गुम हो गई है।

सट्टेबाजी जोरों पर : आईपीएल के चलते लोगों में सट्टेबाजी की प्रवृत्ति भी बढती जा रही है। आखिर बीसीसीआई समाज को किस ओर ले जाना चाहती है। सट्टेबाजी का आलम तो यह है कि पाकिस्तान में भी आईपीएल का प्रसारण सट्टेबाजों के दबाव में हो चुका है।सिर्फ भारत में ही रोजाना 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का सट्टा लगता है। विदेशों में भी ऑनलाइन सट्टा लगाया जा रहा है।

सट्टेबाजी के बारे में पिछले दिनों भोपाल की बड़ी झील के समीप पहाड़ी में स्थित एक होटल के वेटरों को बोलते सुना था कि उनका पूरा वेतन आईपीएल की सट्टेबाजी में चला गया। वे तब भी यह कह रहे थे कि हम सट्टा खेलना नहीं छोड़ेंगे। हमें क्रिकेट का नशा हो चुका है। यह तो एक उदाहरण है लेकिन सच्चाई यह है कि उच्च वर्ग से लेकर निम्न वर्ग तक लोग क्रिकेट के सट्टे में फंसते जा रहे हैं।

बीसीसीआई को कोई फिक्र नहीं : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सट्टेबाजी की जरा भी फिक्र नहीं है। उलटे बीसीसीआई के आईएस बिंद्रा कई सालों से खुले आम कह रहे हैं कि क्रिकेट सट्टा को केंद्र शासन से मान्यता मिलनी चाहिए। जब विदेशों में विभिन्न खेलों पर सट्टा फल-फूल रहा है तो भारत में क्यों नहीं। बीसीसीआई को शायद स्वस्थ समाज की चिंता नहीं है इसलिए उसने आईपीएल के रूप में धीमा जहर परोस दिया है। आईपीएल सिर्फ खेल बन कर रह जाता तो ठीक है लेकिन इसमें ग्लैमर की सेंधमारी से अब सबकुछ स्वस्थ नहीं रह गया है।

क्या बंद हो आईपीएल : आईपीएल को बंद करने के बजाय उसका नियंत्रण पूरी तरह से बीसीसीआई के हाथ में आ जाना चाहिए। अभी इसमें आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी का फंडा हावी है लेकिन एक बार बीसीसीआई के कब्जे में आने के बाद सुधार की पूरी तरह से गुंजाईश है। कमसे कम रात की रंगीनियों पर तो नियंत्रण किया ही जा सकता है। हां, इसके लिए अरबपति फ्रेंचाइजियों का भी सहयोग अपेक्षित है।

फायदा भारतीय खिलाड़ियों को हुआ : आईपीएल के तीन संस्करण से कई भारतीय खिलाड़ी उभरे। उदाहरण के लिए यूसुफ पठान आईपीएल की ही देन है। उनके अलावा एम.बिसला, टी.सुमन, के.जाधव, मनीष पांडे, नमन ओझा, आर. विनय कुमार आदि को भी लोग आईपीएल के कारण ही जानने लगे हैं। यदि इस फटाफट के फॉर्मेट को खेल ही रहने दिया जाए और ग्लैमर को कट कर दिया जाए तो खेल का ही भला होगा अन्यथा एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब लोग आईपीएल से उबने लगेंगे। वैसे भी महिलाएं फिर से टीवी सीरियल देखने में व्यस्त हो गईं है और मैच के दौरान भी सड़कों में भीड़ उमड़ने लगी है।