क्रिकेट की नई शक्ति : इंग्लैंड

Publicado  शुक्रवार, मई 21, 2010


प्रशांत रायचौधरी
दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले टी20 विश्व कप में जिस टीम के स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंद पर भारत के युवराज सिंह ने छह गेंदों में छह छक्के जड़े थे वह टीम पहले व दूसरे टी20 विश्व कप में तो कोई करिश्मा नहीं कर सकी लेकिन अब वही टीम ब्रिजटाउन में ऑस्ट्रेलिया जैसी खिताब की प्रबल दावेदार टीम को सात विकेट से हरा कर विश्व सिरमौर बन चुकी है। गत वर्ष टी20 विश्व कप प्रतियोगिता के लीग के अपने पहले मैच में हॉलैंड जैसी कमजोर टीम के खिलाफ हारने वाली इंग्लैंड टीम इस साल टी20 की विश्व कप विजेता टीम बन चुकी है। गत वर्ष टी20 में इंग्लैंड ने आठ अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले थे जिसमें से उसे पांच मैचों में पराजय मिली थी। आखिर क्या कारण है कि साल भर में इस टीम ने चमत्कार कर दिया। जिस टीम को प्रतियोगिता के पहले संभावित विजेता नहीं माना जा रहा था वह अब नए फॉर्मेट का बादशाह बन चुका है। 35 सालों में इंग्लैंड ने आईसीसी की यह पहली प्रतियोगिता जीती है अन्यथा बीते 35 सालों में वह 19 टूर्नामेंटों में जीत से वंचित रहा है।
क्या कारण है जीत के : इंग्लैंड की जीत के कई कारण है जिनमें प्रमुख है टीम में जोशिले खिलाडिय़ों को प्राथमिकता, बढ़िया क्षेत्ररक्षण,स्ट्राइक रेट को गतिशील रखना, पावर प्ले में उम्दा प्रदर्शन, छक्के मारने की क्षमता में वृद्धि, गेंदबाजी में विविधता व टीम वर्क। इन सबके लिए कोच एंडी फ्लॉवर व कप्तान पॉल कालिंगवुड ने प्रशंसनीय पहल की है। इन्हें अनुभवी खिलाड़ी केविन पीटरसन का भी बढिय़ा सहयोग मिला है।
ओपनिंग जोड़ी लाजवाब: इंग्लैंड की ओपनिंग जोड़ी कीसवेटर और माइकल लंब ने आपसी समझबूझ व तालमेल से रन जुटा कर पारी को ठोस आधार दिया। कीसवेटर प्राय: सभी मैचों में छाए। वे यदि बल्ले से नहीं चले तो कीपिंग में बढिय़ा प्रदर्शन किया।
गेंदबाजों ने किया कमाल : इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों साइडबॉटम, ब्रेसनन व स्पिनर स्वान व यार्डी ने उम्दा प्रदर्शन किया। बाएं हाथ के व लंबे बालों वाले तेज गेंदबाज साइडबॉटम ने गति, स्विंग व यॉर्कर में चतुराई दिखाई वहीं ब्रेसनन ने टीम को बढिय़ा स्टार्ट दिया। तीसरे तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने भी समय-समय पर विपक्षी बल्लेबाजों के लिए परेशानी पैदा की। स्पिनर द्वय स्वान व यार्डी ने न केवल कसावट भरी गेंदबाजी की बल्कि विकेट भी चटकाए। इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ कहा जा सकता है। स्पिनर स्वान को स्पर्धा का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि उन्होंने न केवल 10 विकेट लिए बल्कि उनका इकॉनॉमी रेट भी 6.5 रहा।
पीटरसन छाए : प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट केविन पीटरसन ने शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने टीम की जीत में कई उपयोगी पारियां खेलीं। उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 248 रन बनाए। पीटरसन इसका श्रेय आईपीएल को देना चाहते हैं जबकि भारतीय खिलाडि़यों ने अपनी असफलता का दोष आईपीएल के मथ्थे मढ़ दिया।
छक्का मारने में माहिर : इंग्लैंड के प्रमुख बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट 100 से उपर रहा। ये बल्लेबाज स्पिनर हो या तेज गेंदबाज दोनों को समान रूप से छक्का जडऩे में माहिर हैं। इंग्लैंड के पीटरसन के अलावा कीसवेटर, लंब, ल्यूक राइट, कॉलिंगवुड व ई.मोर्गन छोटे फॉर्मेट में छक्के लगाने में माहिर हैं। इंग्लैंड के अलावा किसी और टीम में इसप्रकार की क्षमता नहीं दिखी।
काउंटी का अनुभव काम आया: इंग्लैंड टीम को टी20 काउंटी टूर्नामेंट का अनुभव काफी काम आया। इस ब्रितानी टीम ने टी20 को एक नई दिशा दी है।

धोनी ब्रिगेड का टूट गया सपना

Publicado  गुरुवार, मई 13, 2010

प्रशांत रायचौधरी
कैरेबियाई धरती पर जारी टी20 वर्ल्ड कप क्रिकेट प्रतियोगिता से अंतत: भारतीय टीम बाहर हो गई। सुपर-8 के तीसरे व उसके अंतिम मैच में उसे श्रीलंका ने पांच विकेट से पराजित किया। सुपर-8 में इसके पहले ऑस्ट्रेलिया ने उसे 49 रन से व वेस्टइंडीज ने 14 रन से हराया था। श्रीलंका ने अंतिम आठ गेंदों में 4 छक्के लगाकर भारतीय टीम के छक्के छुड़ा दिए।

देखा जाए तो भारत से इस बार खराब प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी। आईपीएल में भारतीय सितारे जबर्दस्त फॉर्म में थे और सहवाग व धोनी सहित कई सीनियर साथियों ने कहा था कि आईपीएल से थकावट नहीं होती बल्कि बढिय़ा अभ्यास हो जाता है जबकि धोनी ने श्रीलंका से हार के बाद कहा कि आईपीएल की नाइट पार्टियों व एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के कारण आवश्यक फिटनेस बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

क्या कप्तानी में है कमी :

सौरव गांगुली के बाद भारत के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी चूकते से नजर आ रहे है। हो सकता है कि उन्हें आगामी वल्र्ड कप तक आजमाया जाए फिर सुरेश रैना की ताजपोशी हो जाए। रैना को जिम्बाब्वे दौरे के लिए कप्तान बनाए जाने से यही संकेत मिलता है। खैर, धोनी कहते हैं कि हमारे बल्लेबाज शॉर्ट पिच गेंदों को नहीं खेल पाते हैं।

हांलाकि वे यह भी जानते होंगे कि यह कमजोरी पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से है। फिर इस कमी को एक्पोज करने की आवश्यकता क्या है। इस कमी को दूर करने के लिए द.अफ्रीकी कोच गैरी कर्स्टन ने क्या कोई उपाय नहीं किया है। यदि नहीं तो टीम इंडिया अजेय योद्धा बनने का सपना कैसे देख रही है।

आईपीएल ही जिम्मेदार :

सच कहा जाए तो आईपीएल बहुत लंबा चलता है। छोटे फॉर्मेट के क्रिकेट में फिटनेस मायने रखती है। अत: खिलाड़ी पर शारीरिक जोर ज्यादा पड़ता है। ऐसे में वे सौ प्रतिशत कैसे दे सकते हैं। उदाहरण के लिए यूसुफ पठान आईपीएल के हीरो थे लेकिन टी20 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। वे एक भी मैच में मैच विजेता प्रदर्शन नहीं कर सके।

नए सितारों से धोनी खुश नहीं :

कप्तान धोनी का कहना है कि नए सितारों में अनुभव की कमी तथा शॉर्ट पिच गेंदों को खेलने की तकनीक की कमी है। सीनियर खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़, सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली आदि जिस खूबी से स्पिन व तेज गेंदों को खेलते हैं वैसी तकनीक नए खिलाडिय़ों में देखने को नहीं मिल रही है। ये खिलाड़ी वेस्टइंडीज में शॉर्ट पिच गेंदों के सामने पूरी तरह से एक्सपोज हो गए और असहाय नजर आए। इसी तरह चूंकि यहां सहवाग भी नहीं थे तो गंभीर भी विकेट पर पूरे भरोसे के साथ नहीं खेल पा रहे थे। यहां तक सहवाग की गैरमौजूदगी में गौतम गंभीर भी साधारण नजर आए।

जडेजा ने किया निराश :

भारतीय टीम से रवींद्र जडेजा ने सबसे ज्यादा निराश किया। उनके गेंदों पर आधा दर्जन से अधिक छक्के लगे। रवींद्र जडेजा पर मैच दर मैच इतना अधिक भरोसा क्यों किया गया । यह भी कह सकते हैं कि उनके चयन का आधार क्या था। वे आईपीएल से दूर थे जबकि रनों का अंबार लगाने के बावजूद रॉबिन उथप्पा, विराट कोहली, सौरभ तिवारी और मनीष पांडे जैसे खिलाडिय़ों को टीम इंडिया में आने के लिए और कौन सा तरीका अपनाना होगा।

सपोर्ट स्टाफ को हटाए :

आज जमाना प्रोफेशनल्स का है। हर जगह रणनीति के तहत काम किया जाता है। टीम इंडिया ने या तो टी 20 विश्वकप जैसे बड़े टूर्नामेंट में विरोधी टीमों के लिए कोई रणनीति ही नहीं बनाई, और अगर बनाई भी थी, तो कह सकते हैं कि वो पूरी तरह से फ्लॉप हो गई। अब ये रणनीति अगर फ्लॉप रही तो इसका पोस्टमार्टम होना भी जरुरी है। टीम के साथ सपोर्ट स्टाफ में बहुत महंगे कोच और ट्रेनर होने के बावजूद अगर टीम इतनी लचर फील्डिंग करती है तो बेहतर है या तो सपोर्ट स्टाफ को बाहर कर दिया जाए या फिर वो युवा टीम चुनी जाए जो कोच और ट्रेनर के सिखाए रास्ते पर चल सके।

अब क्या करेंगे सितारे :

भारतीय टीम को इसी माह त्रिकोणीय सीरीज खेलने जिम्बाब्वे जाना है। घोषित टीम में सीनियर खिलाडिय़ों धोनी, जहीर, गंभीर, हरभजन सिंह आदि को आराम दिया गया है अत: इन्हें पूरी तरह आराम फरमाना चाहिए और बाद में तरोताजा होने के बाद आगामी 50-50 वर्ल्ड कप क्रिकेट की तैयारियों में व्यस्त हो जाना चाहिए। एक वर्ल्ड कप फिसल गया लेकिन दूसरे को कैच करने का प्रयास जारी रहे तो अच्छा होगा।

दिलों में बसने लगे हैं सुरेश रैना

Publicado  गुरुवार, मई 06, 2010


प्रशांत रायचौधरी
गाजियाबाद जैसे छोटे शहर के सुरेश रैना बड़े खिलाड़ी बन चुके हैैं। उन्होंने पिछले दिनों आईपीएल-3 में और वेस्टइंडीज द्वीप समूह में जारी टी20 वल्र्ड कप क्रिकेट प्रतियोगिता में शानदार शतक जड़कर क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षिक किया है। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ युवा बल्लेबाज की संज्ञा दी है। बाएं हाथ के इस 23 वर्षीय बल्लेबाज ने तारीफों का जवाब यह कह कर दिया कि चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से खेलते समय स्टीफन फ्लेमिंग, महेंद्र सिंह धोनी और मैथ्यू हेडन ने जो मार्गदर्शन दिया उसीका यह परिणाम है। तात्पर्य यह है कि रैना अपने वरिष्ठों के सुझावों को गंभीरता से लेते हैैं और क्रिकेट की दुनिया में लंबे रेस का खिलाड़ी बनना चाहते हैैं। रैना की बल्लेबाजी में युवराज सिंह की झलक लगती है। यह और बात है कि वे इन दिनों युवी से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैैं। टी20 वल्र्ड कप में उन्होंने खिताब की दावेदार टीमों में से एक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले 50 रन 42 गेंदों (4 चौके,1छक्का) पर बनाए लेकिन अगले 51 रन उन्होंने सिर्फ 18 गेंदों में 5 चौकों व 4 छक्कों के सहारे जुटा लिए। उनकी आक्रमकता का इससे बढिय़ा उदाहरण क्या हो सकता है। रैना ने ए.मोर्केल की गेंद पर छक्का मार कर अपना शतक पूरा करने का साहस दिखाया। यह खुशी की बात है कि उन्होंने जब शतक लगाया तब उनके आदर्श महेंद्र सिंह धोनी दूसरी छोर पर थे। रैना जिस तरह से खेल रहे हैैं उससे यह लगता है कि भारत को तीसरे क्रम का खिलाड़ी मिल गया है। रैना वनडे व टी20 में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैैं लेकिन उन्हें अभी टेस्ट में स्वयं को स्थापित करना है। वसीम अकरम का कहना है कि जब तक रैना टेस्ट में कमाल नहीं करते हैैं तब तक सौरव गांगुली से उनकी तुलना नहीं करना चाहिए।
ऐसे बढ़ा रैना का कारवां : एक प्रोफेशनल क्रिकेटर बनने के लिए रैना ने 1999 में शासकीय स्पोट्र्स कॉलेज लखनऊ में दाखिला लिया। वे जल्दी ही चयनकर्ताओं के निगाह में आ गए और जब सिर्फ साढ़े 15 साल के थे तभी अंडर-19 की भारतीय टीम में शामिल कर लिए गए। 2004 के अंडर-19 वल्र्ड कप में रैना ने तीन अर्धशतक लगाए जिसमें 38 गेंदों में बनाए 90 रन शामिल है।
बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी छात्रवृत्ति के लिए चयन : रैना का चयन बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी छात्रवृत्ति के लिए भी हुआ था। बीसीसीआई ने उन्हें छात्रवृत्ति के तहत ऑस्ट्रलिया विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा। वहां से वापस आने के बाद रैना ने उत्तर प्रदेश रणजी ट्रॉफी टीम के लिए एक ही सत्र में 6 मैचों में 620 रन बनाए। इतना ही नहीं रैना के शानदार प्रदर्शन के कारण उत्तर प्रदेश ने रणजी ट्रॉफी जीतने का श्रेय पाया।
पहला अंतर्राष्ट्रीय शतक (101 रन) 2008 में : रैना ने पहला अंतर्राष्ट्रीय शतक 23 जून 2008 को एशिया कप में हांगकांग के खिलाफ लगाया।इसके बाद के मैच में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 84 व बांग्लादेश के खिलाफ 116 नाबाद रन बनाए। तीनों ही अवसरों पर उन्हें मैन ऑफ द मैच का अवार्ड मिला। इस टूर्नामेंट से पहले एक अवसर ऐसा भी आया था जब खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें साल भर तक टीम इंडिया से बाहर होना पड़ा था। बाद में घरु क्रिकेट में बढिय़ा खेल कर उन्होंने वापसी की।
तीसरा शतक डेढ़ साल बाद : रैना को वनडे का तीसरा शतक लगाने में डेढ़ साल का समय लग गया। तीसरा शतक उन्होंने ढाका में आयोजित ट्राई नेशंस स्पर्धा में श्रीलंका के खिलाफ (106 रन) 13 जनवरी 2010 में लगाया। दूसरे शतक व तीसरे शतक के बीच डेढ़ साल का अंतर रहा। इस बीच रैना तीस से ज्यादा वनडे खेले लेकिन सफलता नहीं मिली।
भविष्य है उज्जवल : रैना के बारे में महान कपिलदेव का कहना है कि उनका भविष्य उज्ज्वल है लेकिन उन्हें अभी से आसमां पर नहीं चढ़ाना चाहिए। कपिल उनमें भविष्य का कप्तान भी देखते हैं।
फील्डिंग है लाजवाब : रैना सीधे थ्रो से रनआउट करने में माहिर हैं। साथ ही वे एक चतुर फील्डर भी हैं। उनकी फुर्ती युवराज या मोहम्मद कैफ से कम नहीं है।
बल्लेबाजी की खूबी : रैना कवर ड्राइव लगाने में माहिर है लेकिन वे मिडविकेट क्षेत्र में गेंद को फ्लिक करने में भी उतने ही पारंगत हैं। उनका फुटवर्क काफी अच्छा है जिससे वे स्पिनरों की जमकर धुनाई करते हैं। तेज गेंदबाजों को भी आगे बढ़कर धुनाई करने में माहिर हैं। इसके अलावा रैना फाइन लेग पर स्कूप शॉट खेलने में भी माहिर हैं।
आवश्यकता है मानसिक दृढ़ता कायम रखने की: रैना को यदि लंबे समय तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बने रहना है तो उन्हें सचिन व द्रविड़ जैसी एकाग्रता विकसित करनी होगी। यदि वे युवराज सिंह जैसी जीवनशैली अपनाएंगे तो कांबली या मोहम्मद कैफ बनने में उन्हें देर नहीं लगेगी। गनीमत है कि आईपीएल के दौरान चेन्नई सुपर किंज्स के कप्तान धोनी से काफी कुछ सीखने को मिला जो कि टीम इंडिया में उन्हें स्थाई जगह बनाने में लाभदाई साबित होगा।

वनडे मैचों में प्रदर्शन
मैच-पारी-कुल रन--सर्वश्रेष्ठ- कुल शतक -अर्धशतक

90-73-2214-116*-3-15
प्रथम श्रेणी के मैचों में प्रदर्शन
मैच-पारी-कुल रन--सर्वश्रेष्ठ- कुल शतक -अर्धशतक
51-86-3684-203-6-25
टी20 अंतर्राष्ट्रीय में प्रदर्शन
मैच-पारी-कुल रन--सर्वश्रेष्ठ- कुल शतक -अर्धशतक
13-12-268-101-1-1
आईपीएल में प्रदर्शन
मैच-पारी-कुल रन--सर्वश्रेष्ठ- कुल शतक -अर्धशतक
30-28-855-98-0-5