प्रशांत रायचौधरी
कैरेबियाई धरती पर जारी टी20 वर्ल्ड कप क्रिकेट प्रतियोगिता से अंतत: भारतीय टीम बाहर हो गई। सुपर-8 के तीसरे व उसके अंतिम मैच में उसे श्रीलंका ने पांच विकेट से पराजित किया। सुपर-8 में इसके पहले ऑस्ट्रेलिया ने उसे 49 रन से व वेस्टइंडीज ने 14 रन से हराया था। श्रीलंका ने अंतिम आठ गेंदों में 4 छक्के लगाकर भारतीय टीम के छक्के छुड़ा दिए।
देखा जाए तो भारत से इस बार खराब प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी। आईपीएल में भारतीय सितारे जबर्दस्त फॉर्म में थे और सहवाग व धोनी सहित कई सीनियर साथियों ने कहा था कि आईपीएल से थकावट नहीं होती बल्कि बढिय़ा अभ्यास हो जाता है जबकि धोनी ने श्रीलंका से हार के बाद कहा कि आईपीएल की नाइट पार्टियों व एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के कारण आवश्यक फिटनेस बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
क्या कप्तानी में है कमी :
सौरव गांगुली के बाद भारत के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी चूकते से नजर आ रहे है। हो सकता है कि उन्हें आगामी वल्र्ड कप तक आजमाया जाए फिर सुरेश रैना की ताजपोशी हो जाए। रैना को जिम्बाब्वे दौरे के लिए कप्तान बनाए जाने से यही संकेत मिलता है। खैर, धोनी कहते हैं कि हमारे बल्लेबाज शॉर्ट पिच गेंदों को नहीं खेल पाते हैं।
हांलाकि वे यह भी जानते होंगे कि यह कमजोरी पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से है। फिर इस कमी को एक्पोज करने की आवश्यकता क्या है। इस कमी को दूर करने के लिए द.अफ्रीकी कोच गैरी कर्स्टन ने क्या कोई उपाय नहीं किया है। यदि नहीं तो टीम इंडिया अजेय योद्धा बनने का सपना कैसे देख रही है।
आईपीएल ही जिम्मेदार :
सच कहा जाए तो आईपीएल बहुत लंबा चलता है। छोटे फॉर्मेट के क्रिकेट में फिटनेस मायने रखती है। अत: खिलाड़ी पर शारीरिक जोर ज्यादा पड़ता है। ऐसे में वे सौ प्रतिशत कैसे दे सकते हैं। उदाहरण के लिए यूसुफ पठान आईपीएल के हीरो थे लेकिन टी20 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। वे एक भी मैच में मैच विजेता प्रदर्शन नहीं कर सके।
नए सितारों से धोनी खुश नहीं :
कप्तान धोनी का कहना है कि नए सितारों में अनुभव की कमी तथा शॉर्ट पिच गेंदों को खेलने की तकनीक की कमी है। सीनियर खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़, सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली आदि जिस खूबी से स्पिन व तेज गेंदों को खेलते हैं वैसी तकनीक नए खिलाडिय़ों में देखने को नहीं मिल रही है। ये खिलाड़ी वेस्टइंडीज में शॉर्ट पिच गेंदों के सामने पूरी तरह से एक्सपोज हो गए और असहाय नजर आए। इसी तरह चूंकि यहां सहवाग भी नहीं थे तो गंभीर भी विकेट पर पूरे भरोसे के साथ नहीं खेल पा रहे थे। यहां तक सहवाग की गैरमौजूदगी में गौतम गंभीर भी साधारण नजर आए।
जडेजा ने किया निराश :
भारतीय टीम से रवींद्र जडेजा ने सबसे ज्यादा निराश किया। उनके गेंदों पर आधा दर्जन से अधिक छक्के लगे। रवींद्र जडेजा पर मैच दर मैच इतना अधिक भरोसा क्यों किया गया । यह भी कह सकते हैं कि उनके चयन का आधार क्या था। वे आईपीएल से दूर थे जबकि रनों का अंबार लगाने के बावजूद रॉबिन उथप्पा, विराट कोहली, सौरभ तिवारी और मनीष पांडे जैसे खिलाडिय़ों को टीम इंडिया में आने के लिए और कौन सा तरीका अपनाना होगा।
सपोर्ट स्टाफ को हटाए :
आज जमाना प्रोफेशनल्स का है। हर जगह रणनीति के तहत काम किया जाता है। टीम इंडिया ने या तो टी 20 विश्वकप जैसे बड़े टूर्नामेंट में विरोधी टीमों के लिए कोई रणनीति ही नहीं बनाई, और अगर बनाई भी थी, तो कह सकते हैं कि वो पूरी तरह से फ्लॉप हो गई। अब ये रणनीति अगर फ्लॉप रही तो इसका पोस्टमार्टम होना भी जरुरी है। टीम के साथ सपोर्ट स्टाफ में बहुत महंगे कोच और ट्रेनर होने के बावजूद अगर टीम इतनी लचर फील्डिंग करती है तो बेहतर है या तो सपोर्ट स्टाफ को बाहर कर दिया जाए या फिर वो युवा टीम चुनी जाए जो कोच और ट्रेनर के सिखाए रास्ते पर चल सके।
अब क्या करेंगे सितारे :
भारतीय टीम को इसी माह त्रिकोणीय सीरीज खेलने जिम्बाब्वे जाना है। घोषित टीम में सीनियर खिलाडिय़ों धोनी, जहीर, गंभीर, हरभजन सिंह आदि को आराम दिया गया है अत: इन्हें पूरी तरह आराम फरमाना चाहिए और बाद में तरोताजा होने के बाद आगामी 50-50 वर्ल्ड कप क्रिकेट की तैयारियों में व्यस्त हो जाना चाहिए। एक वर्ल्ड कप फिसल गया लेकिन दूसरे को कैच करने का प्रयास जारी रहे तो अच्छा होगा।
धोनी ब्रिगेड का टूट गया सपना
Publicado गुरुवार, मई 13, 2010
प्रस्तुतकर्ता
प्रशांत रायचौधरी
पर
गुरुवार, मई 13, 2010
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2 टिप्पणियाँ:
Bhartiya Team par aapki tippani satik hai. Ab Dhoni-brigade ko aatmanirikshan karna chahiye.
Mukul Shastri
धोनी से यह पूछा जाए कि आखिर आईपीएल ने सबको किस तरह से निचोड़ा है ? क्या वे इस निचुड़ने की प्रक्रिया का खुलासा करेंगे ? आखिर जो टीमे जीती, उसके खिलाड़ी भी तो आईपीएल में थे। फिर वे कैसे जीत गए ? यदि धोनी साफ साफ बता दें, तो शायद खेलप्रेमी उन्हें माफ कर दें। सच क्या है, इसे सभी जानते हैं, हम तो उन्हीं से जानना चाहते हैं कि आखिर सब लोग एक साथ कैसे निचुड़ गए ?
डॉ महेश परिमल
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