
प्रशांत रायचौधरी
ओलिंपिक, एशियाड व कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा आकर्षण एथलेटिक्स का होता है लेकिन भारत एथलेटिक्स में झंडे गाड़ने में असफल ही है । नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत एथलेटिक्स में कोई कमाल नहीं कर सका है जबकि गेम्स में अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, रशिया व कोरिया जैसी सशक्त टीमें भाग नहीं लेती हैं। अब जबकि भारत में खेलों में पैसा बरसने लगा है, स्पांसरों की कोई कमी नहीं है, ढेरों अकादमी खुल रहे हैं फिर भी यूसैन बोल्ट एथलेटिक्स में पीछे रहना आश्चर्यजनक है ।भारत में yयूसैन बोल्ट तो दूर की बात है, टाइसन ग्रे,ए.पॉवेल या नई दिल्ली 100 मीटर दौड़ के विजेता जमैका के लोरेन क्लार्क के समकक्ष पहुंचने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
तीन प्रमुख खेलों में भारत की विभिन्न खेलों में पदकों की दौड़
बीजिंग ओलिंपिक (2008)
1 स्वर्ण, 2 कांस्य : कुल 3 पदक
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दोहा एशियन गेम्स (2006)
9 स्वर्ण, 18 रजत,24 कांस्य : कुल : 51 पदक
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दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स (2006)
22 स्वर्ण, 17 रजत, 11 कांस्य पदक : कुल 50 पदक
बीते कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 50 पदक और एशियन गेम्स में 51 पदक जीते थे लेकिन बीजिंग ओलिंपिक में उसे सिर्फ 3 ही पदक मिले। अमेरिका, चीन, जापान,रशिया व जर्मनी जैसी सशक्त टीमों की अनुपस्थिति में भारत कॉमनवेल्थ में पदकों का अर्धशतक तो लगाने में सफल होता है लेकिन ओलिंपिक में वह उपलब्धि कहां गायब हो जाती है। सच तो यह है यदि विश्व स्तर पर देखा जाए तो भारत अभी काफी पीछे है। ओलिंपिक में जहां चीन व अमेरिका पदकों का शतक लगाते हैं वहीं भारत का प्रदर्शन शर्मनाक ही रहता है। पिछले ओलिंपिक में यदि अभिनव बिंद्रा को शूटिंग में स्वर्ण नहीं मिलता तो व्यक्तिगत स्वर्ण सूखा ही रह जाता।
एथलेटिक्स में पीछे है भारत :
खेलों की दुनिया में भारतीय एथलीटों को अभी भी वह सम्मान नहीं प्राप्त है जो किसी समय उड़न सिख मिल्खा सिंह व उड़न परी पीटी ऊषा को प्राप्त था। जमैका जैसे छोटे देश ने यूसैन बोल्ट के माध्यम से जो गौरव प्राप्त किया है वह अतुलनीय है। वैसे हमने शूटिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, तीरंदाजी, टेबल-टेनिस व टेनिस में विश्व ख्याति पाई है लेकिन आउटडोर गेम्स में एथलेटिक्स में हम फिसड्डी साबित हो रहे हैं ।
क्या है कमी : देखा जाए तो भारत में शासकीय स्तर पर प्रयास काफी हो रहे हैं लेकिन फिर भी नतीजा संतोषजनक नहीं है। एथलीटों को इंफ्रास्ट्रक्चर व अकादमी की सुविधा जॉब च्यारंटी आदि सभी सुविधाएं दी जा रही है लेकिन एक भी बोल्ट पैदा नहीं हो पा रहा है। पीटी ऊषा जैसी कई एथलीटो ने निजी अकादमी भी स्थापित की है लेकिन अभी नतीजे आने प्रारंभ नहीं हुए हैं। पिछले दो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को एथलेटिक्स में सिर्फ 5 ही पदक मिले। क्या यह उदाहरण भारत के दर्दे हाल जानने के लिए काफी नहीं है।
जमैका का कमाल
नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में जमैका के लेरोन क्लार्क ने 10.12 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ जीत ली जबकि भारत के अब्दुल नजीर कुरैशी फाइनल के लिए क्वालीफाई ही नहीं कर सके। जमैका जैसे छोटे देश का एथलेटिक्स में कमाल रिसर्च का विषय है। पिछले एक दशक से एथलेटिक्स में इसका दबदबा बढ़ा है। जमैका के यूसैन बोल्ट ने 100 मीटर व 200 मीटर की दौड़ 9.69 सेकंड व 19.30 से. के समय में तय कर नया विश्व व ओलिंपिक कीर्तिमान रचा है। इस रफ्तार के सौदागर ने जो कमाल किया है उसे दोहराने में अन्यों को काफी समय लग जाएगा।
क्यों आगे है जमैका
1. वहां स्कूली स्तर पर बच्चों को एथलेटिक्स के लिए प्रेरित किया जाता है।
2. अंडर-19 स्तर की एथलेटिक्स स्पर्धा में दर्शकों की संख्या 20 से 25 हजार की होती है जिससे साबित होता है कि वहां एथलेटिक्स की जड़ कितनी मजबूत है।
3. एथलीटों को विश्व स्तरीय बनाने के लिए वहां हाई परफॉमेंस ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं जिसमें विश्व प्रसिद्ध कोच प्रशिक्षण देते हैं।
4. एथलीटों की गति व शक्ति बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक ढंग से प्रशिक्षण दिया जाता है।
5. एथलेटिक्स कोच स्टीफन फ्रांसिस के क्लब में 70 से ज्यादा एथलीट उच्च प्रशिक्षण ले रहे हैं।
प्युमा का है सहयोग : जमैका में एथलीटों को गढ़ने में प्युमा ने काफी रूचि ली है। यूसैन बोल्ट इसके उदाहरण है। बोल्ट को प्युमा ने आर्थिक मामलों में तनाव रहित रखा जिससे विश्वस्तरीय बनने में उन्हें मदद मिली।
जहां चाह है वहां राह है
जमैका में जब स्टीफन फ्रांसिस व फॉस्टर ने एथलेटिक्स क्लब की स्थापना की थी तब उनकी आर्थिक मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आया। इन्होंने इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी और फॉस्टर ने अपनी कार बेच दी और क्लब की आवश्यकताएं जुटाईं। प्युमा तो बहुत बाद में बोल्ट से जुड़ा।
अमेरिका का भी है योगदान :
जमैका की नई पीढ़ी अमेरिका में पढ़ते हुए वहां एथलेटिक्स का प्रशिक्षण लेना पसंद करते हैं। इसकी वजह यह है कि वहां खेल के साथ पढ़ाई की सुविधा भी मिल जाती है। प्रशिक्षण भी आधुनिक ढंग से मिल जाता है। जमैका के 25 से ज्यादा एथलेटिक्स के कोच अमेरिकी यूनिवर्सिटी में कोचिंग दे रहे हैं तथा सैकड़ों जमैकन एथलीट उन यूनिवर्सिटीज में अध्ययनरत हैं।
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ओलिंपिक, कॉमनवेल्थ और हम
इवेंट-ओलिंपिक-कॉमनवेल्थ-भारत
100 मीटर-9.69 से.-9.88 से.-10.30 से.
200मीटर-19.30 से.-19.97 से.-20.73 से.
400 मीटर- 43.49 से.-44.52 से.-45.48 से.
800 मीटर - 1:42.58 से.-1: 43.22 से.-1:45.77 से.
1500 मीटर- 3:32.07 से.-3:32.16से.-3:38.00 से.
100 मीटर दौड़ में विश्व के टॉप-10 एथलीट
1. यूसैन बोल्ट -जमैका-9.58 सेकंड(2009)
2.टायसन गे-अमेरिका-9.69 सेकंड (2009)
3.असाफा पावेल-जमैका-9.72 से. (2008)
4.नेस्टा कार्टर -जमैका-9.78 से. (2010)
5.मॉरिस ग्रीन -अमेरिका-9.79 से. (1999)
5.डोनोवान बैली -कनाडा-9.79 से.(1996)
6.ब्रनी सुरीन-कनाडा-9.84 से. (1999)
6.लिरॉय बेरेल-अमेरिका-9.84 से. (1994)
7.जस्टिन गेटिन-अमेरिका-9.85 से. (2004)
7.ओलुसोजी फसुवा -नाइजीरिया- 9.85 से. (2006)
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पांच प्रमुख इवेंट में ओलिंपिक रिकॉर्ड
100 मीटर -यूसैन बोल्ट -जमैका-9.69 से. (2008 बीजिंग ओलिंपिक)
200 मीटर-यूसैन बोल्ट-जमैका-19.30 से. (2008 बीजिंग ओलिंपिक)
400मीटर-माइकल जॉनसन-अमेरिका-43.49 से. (1996,अटलांटा ओ.)
800 मीटर-वी. रोडल-नॉर्वे-1:42.58 से. (1996,अटलांटा ओ.)
1500 मीटर - नोआ नेनी-केन्या-3:32.07 से. (2000,सिडनी ओ.)
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पांच प्रमुख इवेंट में भारतीय रिकॉर्ड
100 मीटर दौड़ : अनिल कुमार - 10.30 से.(2005)
200 मीटर दौड़ - अनिल कुमार-20.73 से.(2000)
400 मीटर दौड़-के.एम.बीनु-45.48 से.(2004)
800 मीटर दौड़-श्रीराम सिंह-1:45.77 (1976)
1500 मीटर दौड़- बहादुर प्रसाद- 3:38.00 (1995)
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पांच प्रमुख इवेंट में कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड
100 मीटर : ए.बोल्डन -.त्रिनिदाद 9.88 से.-(1998)
200 मीटर-फ्रेंकी फ्रेडरिक नामीबिया-19.97 से. (1994)
400 मीटर- इवान थॉमस -वेल्स- 44.52 से.
800 मीटर- स्टीव क्रेम-इंज्लैंड- 1:43.22
1500 मीटर-फिलबर्ट (तंजानिया)-3:32.16
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इनका कहना है
हमारे समय में एथलेटिक्स में सुविधाओं की कमी थी लेकिन जोश, जज्बा व जुनून बरकरार था। फौजी होने के नाते विरोधी को हराने की भी धुन बनी रहती थी। यही कारण है कि किसी वैज्ञानिक प्रशिक्षण के बिना भी मैं विश्व प्रसिद्ध धावक बन सका। मैं यह नहीं कहूंगा कि बदलते समय में बीता उदाहरण प्रेरक हो सकता है लेकिन यह जरूर कहूंगा कि अब आधुनिक सुविधाएं व रोजगार की गारंटी है जिसका एथलीट पूरा-पूरा लाभ उठाएं। - मिल्खा सिंह, उड़न सिख--------------------------------------------------
भारत में एथलेटिक्स की सुविधाएं तो हैं लेकिन खेलों में छाई राजनीति के कारण तरक्की नहीं हो पा रही है। राज्य संगठनों में ऐसे लोग विराजमान है जिनका खेलों से कोई वास्ता नहीं रहा है। मैंने अपनी अकादमी प्रारंभ की है और बहुत जल्दी विश्व स्तरीय एथलीट वहां से निकलेंगे ऐसा मैं कह सकती हूं। - पीटी ऊषा, उड़न परी
पदकों की दौड़ में पिछड़ गया एथलेटिक्स
Publicado गुरुवार, अक्टूबर 21, 2010
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प्रस्तुतकर्ता
प्रशांत रायचौधरी
पर
गुरुवार, अक्टूबर 21, 2010
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