प्रशांत रायचौधरी
आईसीसी सूत्रों ने संकेत दिया है कि आगामी वर्ल्ड कप क्रिकेट प्रतियोगिता के सात मैचों में रेफरल सिस्टम लागू किया जाएगा। इस निर्णय से बीसीसीआई अलग-थलग पड़ गया है क्योंकि बाकी संबध्द देशों ने रेफरल के लिए पहले ही हरी झंडी दे दी है। रेफरल का उपयोग वर्ल्ड कप में चारों वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल मैचों, दो सेमीफाइनलों व फाइनल में किया जाएगा।
आईसीसी की कहना है कि यदि तकनीकी साधन पूरे होते तो पूरे टूर्नामेंट में इसका उपयोग होता। बहरहाल, मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर, महेंद्र सिंह धोनी आदि भारतीय सितारों को रेफरल के मामले में जबर्दस्त शिकस्त मिली।
क्यों करते हैं सचिन विरोध :
मास्टर ब्लास्टर का मानना है कि अभी रेफरल के मामले में उन्नत तकनीक उपलब्ध नहीं है इसलिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। वैसे रेफ़रल सिस्टम से तकनीक को लेकर कई भ्रांतियाँ हैं लेकिन यह चकित करने के लिए काफी है कि भारत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भी रेफरल के उपयोग में असहमति जताई है।
एलबीडब्ल्यू का जारी है विवाद :
मैदानी अंपायरों को वैसे तो अक्सर एलबीडब्ल्यू आउट होने के मामले में विवादों का सामना करना पड़ता है। उनके सारे निर्णय सही नहीं होते हैं। स्टीव बकनर व पाकिस्तान के अलीम दर पर खिलाड़ी कभी भरोसा नहीं करते रहे हैं। ऐसे में एलबीडब्ल्यू की अपील के मामले में गेंद जब बल्लेबाज के पैड पर लगती है तो उसकी ऊँचाई और लाइन को मापने के लिए जिस ट्रैकिंग सिस्टम का प्रयोग किया जाता है वह भरोसे के लायक नहीं है। उसमें अभी भी तकनीकी खामियां है। वह अभी भी मशीनी बकनर है।
कुछ लोगों का यह मानना है कि यादा मशीनी होने से खेल का प्रभाव प्रभावित होता है। सचिन का मानना है मैदानी अंपायरों से यदाकदा ही गलती होती है इसलिए रेफरल के उपयोग की आवश्यकता नहीं है। ज्ञातव्य है कि सचिन तब से नाराज हैं जब श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में रेफरल सही फैसला नहीं कर सका था।
भारत पड़ गया अलग-थलग :
रेफरल के मामले में सभी टेस्ट खेलने वाले देशों ने आईसीसी का साथ दिया है लेकिन भारत अभी भी उसका विरोध कर रहा है। भारत को आईसीसी का सबसे धनवान राष्ट्र माना जाता है लेकिन इस मामले में उसका धनतंत्र कोई साथ नहीं दे सका है। अन्य देशों का तर्क इस मामले में यह है कि भले ही यह त्रुटिरहित सिस्टम नहीं है लेकिन अंपायरों की गलती को कम करने के लिए बढ़िया मशीनी अंपायर है। देखा जाए तो भारत को अंपायर डिसीजन रेफरल सिस्टम को स्वीकार कर लेना चाहिए जैसा कि अन्य देशों ने किया है। धारा के विपरीत जाने के बीसीसीआई के निर्णय से कोई फ़ायदा नहीं है।



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