
प्रशांत रायचौधरी
दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले टी20 विश्व कप में जिस टीम के स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंद पर भारत के युवराज सिंह ने छह गेंदों में छह छक्के जड़े थे वह टीम पहले व दूसरे टी20 विश्व कप में तो कोई करिश्मा नहीं कर सकी लेकिन अब वही टीम ब्रिजटाउन में ऑस्ट्रेलिया जैसी खिताब की प्रबल दावेदार टीम को सात विकेट से हरा कर विश्व सिरमौर बन चुकी है। गत वर्ष टी20 विश्व कप प्रतियोगिता के लीग के अपने पहले मैच में हॉलैंड जैसी कमजोर टीम के खिलाफ हारने वाली इंग्लैंड टीम इस साल टी20 की विश्व कप विजेता टीम बन चुकी है। गत वर्ष टी20 में इंग्लैंड ने आठ अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले थे जिसमें से उसे पांच मैचों में पराजय मिली थी। आखिर क्या कारण है कि साल भर में इस टीम ने चमत्कार कर दिया। जिस टीम को प्रतियोगिता के पहले संभावित विजेता नहीं माना जा रहा था वह अब नए फॉर्मेट का बादशाह बन चुका है। 35 सालों में इंग्लैंड ने आईसीसी की यह पहली प्रतियोगिता जीती है अन्यथा बीते 35 सालों में वह 19 टूर्नामेंटों में जीत से वंचित रहा है।
क्या कारण है जीत के : इंग्लैंड की जीत के कई कारण है जिनमें प्रमुख है टीम में जोशिले खिलाडिय़ों को प्राथमिकता, बढ़िया क्षेत्ररक्षण,स्ट्राइक रेट को गतिशील रखना, पावर प्ले में उम्दा प्रदर्शन, छक्के मारने की क्षमता में वृद्धि, गेंदबाजी में विविधता व टीम वर्क। इन सबके लिए कोच एंडी फ्लॉवर व कप्तान पॉल कालिंगवुड ने प्रशंसनीय पहल की है। इन्हें अनुभवी खिलाड़ी केविन पीटरसन का भी बढिय़ा सहयोग मिला है।
ओपनिंग जोड़ी लाजवाब: इंग्लैंड की ओपनिंग जोड़ी कीसवेटर और माइकल लंब ने आपसी समझबूझ व तालमेल से रन जुटा कर पारी को ठोस आधार दिया। कीसवेटर प्राय: सभी मैचों में छाए। वे यदि बल्ले से नहीं चले तो कीपिंग में बढिय़ा प्रदर्शन किया।
गेंदबाजों ने किया कमाल : इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों साइडबॉटम, ब्रेसनन व स्पिनर स्वान व यार्डी ने उम्दा प्रदर्शन किया। बाएं हाथ के व लंबे बालों वाले तेज गेंदबाज साइडबॉटम ने गति, स्विंग व यॉर्कर में चतुराई दिखाई वहीं ब्रेसनन ने टीम को बढिय़ा स्टार्ट दिया। तीसरे तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने भी समय-समय पर विपक्षी बल्लेबाजों के लिए परेशानी पैदा की। स्पिनर द्वय स्वान व यार्डी ने न केवल कसावट भरी गेंदबाजी की बल्कि विकेट भी चटकाए। इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ कहा जा सकता है। स्पिनर स्वान को स्पर्धा का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि उन्होंने न केवल 10 विकेट लिए बल्कि उनका इकॉनॉमी रेट भी 6.5 रहा।
पीटरसन छाए : प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट केविन पीटरसन ने शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने टीम की जीत में कई उपयोगी पारियां खेलीं। उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 248 रन बनाए। पीटरसन इसका श्रेय आईपीएल को देना चाहते हैं जबकि भारतीय खिलाडि़यों ने अपनी असफलता का दोष आईपीएल के मथ्थे मढ़ दिया।
छक्का मारने में माहिर : इंग्लैंड के प्रमुख बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट 100 से उपर रहा। ये बल्लेबाज स्पिनर हो या तेज गेंदबाज दोनों को समान रूप से छक्का जडऩे में माहिर हैं। इंग्लैंड के पीटरसन के अलावा कीसवेटर, लंब, ल्यूक राइट, कॉलिंगवुड व ई.मोर्गन छोटे फॉर्मेट में छक्के लगाने में माहिर हैं। इंग्लैंड के अलावा किसी और टीम में इसप्रकार की क्षमता नहीं दिखी।
काउंटी का अनुभव काम आया: इंग्लैंड टीम को टी20 काउंटी टूर्नामेंट का अनुभव काफी काम आया। इस ब्रितानी टीम ने टी20 को एक नई दिशा दी है।
क्रिकेट की नई शक्ति : इंग्लैंड
Publicado शुक्रवार, मई 21, 2010
प्रस्तुतकर्ता
प्रशांत रायचौधरी
पर
शुक्रवार, मई 21, 2010
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1 टिप्पणियाँ:
आभार इन जानकारियों के लिए.
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